ऐसा क्यों है विधाता-eMithilaHaat

उन दिनों…  सुबह वह भी जागा करता था, रोटी की तलाश में भागा करता था. कभी -कभी मिल जाता था  उसे कोई काम, कभी -कभी धक्के खाया करता था. कभी […]

वह

वह हाथ की लकीरों को पढ़ रहा था, बीते कल को मोतियों से गढ़ रहा था. अब तक उसने क्या खोया था. कल शाम वह क्यों रोया था. वह सजी […]

जिंदगी-eMithilaHaat

जिंदगी एक नदी है, इस नदी में डूब कर भी पार जाना सीख लो जिंदगी एक जुआ है गर, जुए में हार कर भी जीत जाना सीख लो जिंदगी है […]

उनको पाने की जिद है-eMithilaHaat

उनको पाने की जिद है, उनके होने का गम है. वक्त को जिद है इंतज़ार की, पर, उन्हे जाने की जिद है. अब पहर वो बीत गया,   जब साथ […]

दिल्ली शहर

सेक्टरों में बंटा हुआ शहर , मुहल्लों से अटा पड़ा शहर, यहाँ नम्बरों से पहचाने जाते हैं घर.   कहते हैं इसे दिल्ली, पर इसका दिल नहीं, गिरते भागते लोग […]